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लेखक:

सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला

जन्म :- 21 फरवीर, 1899।

मृत्यु :- 15 अक्टूबर 1961।

जन्म-स्थान :- बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल नामक देशी राज्य में।

मूल निवास : उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का गढ़ाकोला, नामक गाँव।

शिक्षा : हाईस्कूल तक।

भाषा ज्ञान : हिंदी, बंगला, अंग्रेजी और संस्कृत का ज्ञान स्वतंत्र रूप से।

1918 से 1922 ई. के मध्य तक महिषादल राज्य की सेवा में। उसके बाद से संपादन, स्वतंत्र लेखन और अनुवाद-कार्य। 1922-23 में ‘समन्वय’ (कलकत्ता) का संपादन। 1923 ई. के अगस्त से ‘मतवाला’- मंडल में। कलकत्ता छोड़ा तो लखनऊ आए, जहाँ गंगा-पुस्तकमाला-कार्यालय और वहाँ से निकलने वाली मासिक पत्रिका ‘सुधा’ से 1935 के मध्य तक संबद्ध रहे। प्रायः 1940 तक लखनऊ में। 1942-43 से स्थाई रूप से इलाहाबाद में रहकर मृत्यु-पर्यंत स्वतंत्र लेखन और अनुवाद-कार्य। पहली प्रकाशित कविता : ‘जन्मभूमि’ (‘प्रभा, मासिक, कानपुर, जून 1920)। पहला प्रकाशित निबन्ध : ‘बंगभाषा का उच्चारण’ (सरस्वती’, मासिक, प्रयाग, अक्टूबर, 1920) पहली प्रकाशित पुस्तक अनामिका (1923 ई. में)।

कृतियाँ

उपन्यास :- अप्सरा, अलका, प्रभावती, निरुपमा, कुल्ली भाट, बिल्लेसुर बकरिहा, चोटी की पकड़, भक्त ध्रुव, भक्त प्रह्लाद, महाराणा प्रताप, भीष्म पितामह। काले कारनामे, चमेली, इन्दुलेखा (अपूर्ण)।

कहानी-संग्रह :- लिली, चतुरी चमार, सुकुल की बीवी :- ( सुकुल की बीवी, श्रीमती गजानन्द शास्त्रिणी, कला की रूप-रेखा, क्या देखा।) देवी :- (देवी, भक्त और भगवान, चतुरी चमार, हिरनी, सुकुल की बीवी, अर्थ, श्रीमती गजानन्द शास्त्रिणी, क्या देखा, प्रेमिका-परिचय, जान की!।), सम्पूर्ण कहानियाँ :- (प्रेमपूर्ण तरंग, क्या देखा, पद्मा और लिली, ज्योतिर्मयी, कमला, श्यामा, प्रेमिका-परिचय, हिरनी, परिवर्तन, अर्थ, न्याय, स्वामी सारदानन्द, महाराज और मैं, सखी, देवी, चतुरी चमार, राजा साहब को ठेंगा दिखाया, सफलता, भक्त और भगवान, कला की रूप-रेखा, सुकुल की बीवी, श्रीमती गजानन्द शास्त्रिणी, देवर का इन्द्रजाल, जान की!, दो दाने, विद्या।) महाभारत (पुराकथा)

निबन्ध-संग्रह :- रवीन्द्र कविता-कानन, प्रबंध-पद्म, प्रबंध-प्रतिमा, चाबुक, चयन, संग्रह, प्रबंध पराग।

कविता संग्रह :- परिमल, गीतिका, द्वितीय अनामिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नए पत्ते, अर्चना, आराधना, गीत-गुंज, सांध्य काकली, राम की शक्तिपूजा, सरोज स्मृति, रागविराग, अपरा, अनामिका।

आराधना

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